“मशरूम की खेती से बदली किस्मत: एक गृहिणी की 36 लाख रुपये के टर्नओवर तक की प्रेरणादायक यात्रा”

परिचय

भारत में आजकल मशरूम खेती (Mushroom Farming) तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह न केवल एक पौष्टिक खाद्य पदार्थ है बल्कि किसानों और उद्यमियों के लिए कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय भी है। बिहार के मुजफ्फरपुर की गृहिणी रमा कुमारी ने इसी मशरूम व्यवसाय को अपनाकर एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की है।

आज के दौर में महिलाएँ न केवल घर की जिम्मेदारी निभा रही हैं, बल्कि अपनी मेहनत और लगन से नए-नए व्यवसाय भी खड़ा कर रही हैं। रमा कुमारी इसका एक बेहतरीन उदाहरण हैं। जो काम उन्होंने एक छोटे से प्रयोग के रूप में अपने घर की रसोई में शुरू किया था, वही आज उन्हें सालाना 36 लाख रुपये का राजस्व दिला रहा है। उनकी यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि यदि संकल्प मजबूत हो और सीखने की इच्छा हो, तो सीमित संसाधनों से भी बड़ा व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है।

शिक्षा और शुरुआती प्रेरणा

रमा कुमारी ने तमिलनाडु के भारथिअर विश्वविद्यालय से बीकॉम की पढ़ाई की है। शादी के बाद वे अपने आईटी प्रोफेशनल पति के साथ पुणे में रहीं। दोनों को मशरूम आधारित व्यंजन बेहद पसंद थे। लेकिन जब 2020 की महामारी के दौरान यह दंपत्ति वापस मुजफ्फरपुर लौटा, तो उन्हें गुणवत्तापूर्ण मशरूम की कमी खलने लगी।

यही कमी रमा के भीतर उद्यमिता की चिंगारी लेकर आई। उन्होंने ठान लिया कि अब मशरूम की खेती स्वयं करेंगी और स्थानीय स्तर पर लोगों तक ताज़ा व अच्छी क्वालिटी का मशरूम पहुँचाएँगी।

पहला प्रयोग और उत्साह

2021 में रमा ने ऑनलाइन खोजबीन की और 120 रुपये में 1 किलो ऑयस्टर मशरूम स्पॉन मंगवाया। इस स्पॉन से उन्होंने पाँच बैग तैयार किए और पहली ही फसल में उन्हें 12 किलो कुकुरमुत्ता मिला। यह नतीजा उनके लिए बेहद उत्साहजनक था।

इस सफलता से प्रेरित होकर रमा ने स्थानीय कुकुरमुत्ता विशेषज्ञ मनोरमा सिंह से मार्गदर्शन लिया और बटन कुकुरमुत्ता की खेती शुरू की। उन्होंने 25,000 रुपये का निवेश करके ग्रो रूम बनाया। नतीजा यह रहा कि 2021 की सर्दियों में उन्होंने 200 किलो कुकुरमुत्ता की फसल ली और लगभग 40,000 रुपये की कमाई की। यह उनके जीवन का पहला उद्यमी मील का पत्थर था।

बड़ा कदम: स्पॉन लैब की स्थापना

रमा और उनके पति ने 2022 में पूसा विश्वविद्यालय से मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्होंने अपनी बचत से 16 लाख रुपये का निवेश कर मुजफ्फरपुर की पहली मशरूम स्पॉन लैब – तुलसी स्पॉन लैब स्थापित की।

यह लैब भले ही 10×12 फीट के एक साधारण कमरे से शुरू हुई थी, लेकिन इसकी उपयोगिता बहुत बड़ी थी। स्पॉन उत्पादन के साथ-साथ उन्होंने खेती में रुचि रखने वाले अन्य किसानों को प्रशिक्षण देना भी शुरू किया।

चुनौतियाँ और उपलब्धियाँ

शुरुआती दिनों में कई कठिनाइयाँ आईं – कभी तकनीकी समस्याएँ, कभी उत्पादन में कमी और कभी बाज़ार की अनिश्चितता। लेकिन रमा ने हार नहीं मानी। धैर्य और सीखने की प्रवृत्ति ने उन्हें आगे बढ़ाया।

2023 तक तुलसी स्पॉन लैब पूरी तरह सफल हो गई। आज रमा ऑर्गेनिक ऑयस्टर, बटन और मिल्की मशरूम का उत्पादन करती हैं। उनका मौसमी उत्पादन 250 से 500 किलो तक पहुँच चुका है। इसके साथ ही उनकी लैब हर महीने लगभग 2 टन मशरूम स्पॉन तैयार करती है, जिसे वे अन्य महत्वाकांक्षी किसानों को उपलब्ध कराती हैं। इसके अलावा वे नए उद्यमियों को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बना रही हैं।

सफलता की कहानी

कुछ ही सालों में रमा का यह छोटा-सा प्रयोग एक बड़े व्यवसाय में बदल गया। आज उनकी लैब और खेती से उनका सालाना राजस्व 36 लाख रुपये तक पहुँच चुका है।

रमा कुमारी की यह यात्रा न सिर्फ़ बिहार, बल्कि पूरे भारत की उन महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है जो घर की चारदीवारी से निकलकर अपनी पहचान बनाना चाहती हैं। यह कहानी बताती है कि यदि मन में जुनून हो, तो सीमित साधनों से भी बड़ा सपना साकार किया जा सकता है।

निष्कर्ष :-

रमा कुमारी का मशरूम व्यवसाय इस बात का जीवंत उदाहरण है कि उद्यमिता केवल बड़े संसाधनों का खेल नहीं है, बल्कि यह साहस, धैर्य और सही मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने रसोई से शुरू करके पूरे शहर में मशरूम की आपूर्ति तक का सफ़र तय किया और अब आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बन गई हैं।

लेखक प्रोफ़ाइल : अंकेश कुमार

Leave a Comment