दिल्ली का AIIMS (All India Institute of Medical Sciences) देश का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित सरकारी अस्पतालों में से एक है। यहाँ ना सिर्फ दिल्ली बल्कि पूरे भारत से लाखों मरीज इलाज के लिए आते हैं। यह अस्पताल गंभीर बीमारियों, एक्सीडेंट, सर्जरी और उन्नत चिकित्सा (advanced care) का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।

पिछले कुछ समय से AIIMS के बारे में अलग-अलग खबरें आ रही हैं — कुछ सराहनीय सफलताओं की और कुछ चुनौतियों की भी। आइए इसे सरल भाषा में समझते हैं।

1. मरीजों का भारी दबाव और इंतज़ार

AIIMS में रोज़ाना 700-800 से ज़्यादा लोग इमरजेंसी में आते हैं और OPD/IPD में लाखों लोग इलाज के लिए पंजीकरण करवाते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक साल में इस अस्पताल में करीब 50 लाख मरीजों का इलाज हुआ — यह बड़ी संख्या है और इसी वजह से अस्पताल में लंबी लाइनों और प्रतीक्षा सूची जैसी समस्याएँ देखी जा रही हैं।
कई मरीजों को MRI, CT स्कैन, सर्जरी या अन्य जांचों के लिए महीनों या सालों तक इंतज़ार करना पड़ता है, क्योंकि मरीजों की संख्या इतनी अधिक है कि उपलब्ध संसाधन उन पर पूरी तरह दबाव बना देते हैं।

उदाहरण के तौर पर, कुछ महत्वपूर्ण सर्जरी और जांचों के लिए प्रतीक्षा सूची सालों लंबी हो जाती है, जिससे मरीजों और उनके परिवारों को काफी परेशानी होती है।

2. सुविधाओं में सुधार और नई पहल

हालांकि चुनौतियाँ हैं, AIIMS ने हाल में कई सकारात्मक कदम भी उठाए हैं। इनमें शामिल हैं:

⦁ Ashray नाइट -शेल्टर

2026 की शुरुआत में अस्पताल ने मरीजों और उनके परिचारकों (attendants) के लिए night-shelter सुविधा शुरू की है। इससे वे रात को खुले में प्रतीक्षा करने के बजाय सुरक्षित और आरामदायक स्थान पर रह सकते हैं।
⦁ इमरजेंसी बेड का विस्तार

AIIMS ने योजना बनाई है कि इमरजेंसी वार्ड में 400 बेड एक साथ उपलब्ध हों ताकि ज़्यादा मरीजों को एक साथ इलाज मिल सके। यह विशेष रूप से तब उपयोगी होगा जब आपातकालीन हालात में भीड़ बढ़ जाती है।

⦁ डिजिटल सेवा और पारदर्शिता

लंबी प्रतीक्षा सूची से निपटने के लिए AIIMS ने एक डिजिटल व्यवस्था शुरू करने की योजना बनाई है, जिसमें waiting period (प्रतीक्षा समय) को ऑनलाइन बताया जाएगा। इससे मरीज को अंदाज़ा लगेगा कि कब उसकी बारी आ सकती है और निर्णय लेना आसान होगा।
⦁ अन्य पहलें

AIIMS ने Telemedicine जैसी सेवाएँ भी शुरू की हैं, ताकि कठिन इलाकों से आए मरीजों को दूर बैठकर भी सलाह मिल सके।


3. मरीजों और कर्मचारियों की स्थितियाँ

मरीजों का अनुभव

कुछ लोगों के अनुभव बताते हैं कि AIIMS में सुबह-सुबह बहुत भीड़ होती है, और लोग बहुत जल्दी पर्चा (token) लेने के लिए रात में ही लाइन लगा देते हैं। यह स्थिति खासकर उन लोगों के लिए कठिन होती है जिनके पास आरामदायक रहने की जगह या सहूलियत नहीं होती।

कुछ मरीज यह भी कहते हैं कि डॉक्टरों के पास बहुत ज़्यादा काम होता है, इसलिए वे हर मरीज को पूरा समय नहीं दे पाते। इस वजह से कई बार मरीजों को बुनियादी जानकारी या पर्याप्त ध्यान नहीं मिलता।

कर्मचारियों की शिकायतें

2025 में कर्मचारियों ने यह शिकायत की कि Hospital Patient Care Allowance जैसे भत्ते अचानक हटाने से स्टाफ़ की स्थिति कठिन हो गई है। उन्हें लगता है कि वह मरीजों के जोखिम से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े होने के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा या पारिश्रमिक नहीं पा रहे हैं।

4. गंभीर मामला — हार्ट सर्जरी में गिरावट

2026 की हाल की खबरों में यह बात सामने आई है कि AIIMS में हार्ट सर्जरी की संख्या में रिकॉर्ड गिरावट आई है। सिर्फ इतनी ही नहीं, लंबी प्रतीक्षा सूची भी जारी है और मरीजों को दूसरे अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है। यह स्थिति अस्पताल की सेवा क्षमता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करती है।

5. सफलता की मिसालें

AIIMS सिर्फ समस्याओं का नाम नहीं है। यहाँ कई जीवन-बदलने वाली सफलताएँ भी होती हैं। उदाहरण के लिए:चार महीने की बच्ची की दुर्लभ सर्जरी सफलतापूर्वक की गई।

कैंसर जैसे गंभीर मामलों में बड़े ऑपरेशन और HIPEC जैसी उन्नत चिकित्सा भी होती है।

राजनीतिक तथा सामाजिक तौर पर चर्चित व्यक्ति भी यहां इलाज करा रहे हैं, जैसे राजनेता के उपचार की खबरें।

निष्कर्ष

AIIMS, दिल्ली एक ऐसा अस्पताल है जहाँ सबसे गंभीर और जटिल मामलों का इलाज होता है। यहाँ डॉक्टरों और कर्मचारियों की मेहनत बहुत बड़ी है और कई बार अद्भुत चिकित्सीय सफलताएँ सामने आती हैं। मगर भारी मरीजों की संख्या, लंबी प्रतीक्षा सूची, कर्मचारी तनाव और कुछ प्रशासनिक चुनौतियाँ अस्पताल की स्थिति को जटिल बनाती हैं।

फायदा यह है कि अस्पताल इन चुनौतियों से निपटने के लिए सुधार और नई सेवाएँ भी लागू कर रहा है — जैसे night shelter, digital waiting list, telemedicine और इमरजेंसी बेड का विस्तार। यदि आप या आपका परिवार AIIMS आएँ, तो तैयार रहना चाहिए कि यह सबसे बड़ा चिकित्सालय है जहाँ सेवा के साथ चुनौतियाँ भी जुड़ी हो सकती हैं।

चाहें इलाज कठिन लगे — लेकिन AIIMS देश भर के मरीजों के लिए जीवन-रक्षक संस्थान की भूमिका निभा रहा है।


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